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Showing posts from May, 2022

जब सम्राट अशोक ने बौद्ध भिक्षु को खौलते तेल में डाल दिया-JAB SAMRAT ASHOK NE BODDH BHIKSHU KO KHOULTE TEL ME DAAL DIYA

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सम्राट अशोक कलिंग को पराजित कर उसकी राजधानी में पहुँचे तथा अपने मंत्रियो और सेनापतियों को लेकर एक सभा की। सभा में अशोक ने कलिंग विजय पर अपने सेना की प्रसंशा की। अचानक सभा के बिच में एक बौद्ध भिक्षु आ पहुँचा। उस भिक्षु ने  " सम्राट अशोक की जय हो " कहकर अभिवादन किया।  सम्राट ने पूछा - कहिये भिक्षु महाराज ! आपको क्या चाहिए ? भिक्षु ने कहा - सम्राट, में आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि आपने लाखो मनुष्य का कत्ल करके , लाखो को घायल करके इस कलिंग राज्य पर जो विजय पाई है, क्या यह सच्चा विजय है। क्या यह विजय मानवता का विकाश कर पायेगी ? सम्राट अशोक क्रोधित हो गए। अशोक के आँखों में अंगारे देख महामंत्री राधागुप्त बोले " भिक्षुवर, अपनी वाणी पर सयंम रखे और दरबार की मर्यादा का पालन करे।  भिक्षु ने निडर होकर उत्तर दिया - महामंत्री जी, सत्य को सुनना हमेशा कठिन होता है। में एक भिक्षु हूँ और सत्य कहना एक भिक्षु का धर्म है। में युद्धभूमि से कलिंग के लाखों लोगों को दर्द से कराहते हुए देखकर आया हूँ। आपको क्या मिला यह युद्ध करके। सम्राट अशोक क्रोध से तिलमिला उठे, उन्होंने भिक्षु को कठोर से कठोर दंड

स्त्री की ईच्छा क्या है?-stri ki ichha kya hai?

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स्त्री क्या चाहती है? एक विद्वान को फाँसी लगने वाली थी राजा ने कहा - में तुम्हें आजाद कर दूँगा, यदि मेरे एक सवाल का सही जवाब दोगे तो। प्रश्न था कि, स्त्री आख़िर चाहती क्या है ? विद्वान ने कहा -  मोहलत मिले, तो पता कर के बता सकता हूँ। राजा ने एक साल की मोहलत दे दी। विद्वान बहुत घूमा, बहुत लोगों से मिला, पर कहीं से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आखिर में किसी ने कहा- दूर जंगल में एक भूतनी रहती है वो ज़रूर इस सवाल का जवाब दे सकती है । विद्वान उस भूतनी के पास पहुँचा और अपना प्रश्न उसे बताया भूतनी ने कहा कि मैं एक शर्त पर बताउंगी अगर तुम मुझसे शादी कर लो। उसने सोचा, सही जवाब न पता चला तो जान राजा के हाथ जानी ही है, इसलिए शादी की सहमति दे दी। शादी होने के बाद भूतनी ने कहा - चूंकि तुमने मेरी बात मान ली है, तो मैंने तुम्हें खुश करने के लिए एक फैसला किया है कि मे  12 घन्टे भूतनी और 12 घन्टे खूबसूरत परी बनके रहूँगी। अब तुम ये बताओ कि दिन में भूतनी रहूँ या रात को ? उसने सोचा यदि वह दिन में भूतनी हुई, तो दिन नहीं कटेगा रात में हुई तो रात नहीं कटेगी। अंत में उस विद्वान व्यक्ति ने कहा - ज

Andhviswash kya hai ?

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अन्धविश्वास क्या है ? संक्षेप में कहे तो कुछ ऐसी बाते जो प्राचीन काल से चली आ रही है, जिसे किसी घटना के होने का पीछे का कारण  माना जाता है उसे हम अन्धविश्वास कह सकते है।  विस्तार से कहें तो अंधविश्वास एक ऐसा काल्पनिक डर है जिसमें व्यक्ति को किसी घटना के होने का असली वजह तो पता नहीं होता है लेकिन फिर भी वह वर्षो से चली आ रही मान्यताओं को किसी घटना के होने की वजह मान कर घबरा जाता है और सोचता है, यह किसी बुरी घटना के होने का संकेत है।  अब अंधविश्वास के पीछे कितनी सच्चाई है, यह हम नीचे दी गई कुछ बातों से जानने की कोशिश करेंगे।  अंधविश्वास की शुरूवात कुछ ईन कारणों से हुई होगी। १.  पहला कारण संयोग  जैसे कि कभी किसी के साथ कुछ ऐसी दुर्घटना हुई हो, जिसका कारण वह किसी और चीज को मान लिया हो, लेकिन मात्र वह एक संयोग हो। जैसे की बिल्ली का रास्ता काटना या फिर कोई कहीं जा रहा हो तो उसे पीछे से बुलाना।  ऐसी स्थिति में उस इंसान के साथ कभी अगर छोटी- मोटी दुर्घटना हो गई होगी। तो उस दुर्घटना का जिम्मेदार वह "बिल्ली का रास्ता काटना या उसे पीछे से बुलाना" को माना होगा। फलस्वरूप उसने सभी को इस घटन