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भय के आगे विजय है - Dar Ke Aage JEET hAI

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किसी की सफलता में रुकावट आना, उसका डर एक बड़ा कारण होता है। डर हमेशा सपनों का सबसे बड़ा हत्यारा होता है। हम अपने सपनों का पीछा करने से बचते हैं क्योंकि हमें रास्ते में आने वाली बाधाओं का भय होता है। किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले ही हम आत्म-संदेह और चिंता के एक चक्रव्यूह में फंस जाते हैं और हम सफलता की डगर पर कभी आगे बढ़ ही नहीं पाते हैं। "मै बेहतर नहीं हूं या फिर अगर मैं विफल हो गया तो" बहुत बड़ी संख्या में लोग किसी काम को करने का पहला प्रयास इसी डर की वजह से से नहीं कर पाते हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि हर विफलता के साथ सीखने, बढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। बेशक, किसी भी कार्य को करने के साथ हमेशा यह आशंका बनी रहती है कि उसमें असफल भी हो सकते हैं लेकिन इसकी वजह से कोई कार्य करना ही छोड़ दिया जाय यह तो सही नहीं है। एक डरपोक इन्सान मार्शल आर्ट के शिक्षक के पास आया और उसे बहादुरी सिखाने के लिए कहा। गुरु ने उसकी ओर देखा और कहा: मैं तुम्हें केवल एक शर्त के साथ सिखाऊंगा:- एक महीने के लिए तुम्हें एक बड़े शहर में रहना होगा और रास्ते में मिलने वाले हर व्यक्ति को बताना होगा कि

आध्यात्मिक विचार - spiritual thoughts

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 मित्रों, यदि आप किसी को बिना वजह दु:ख देते है तो आप यह छोड़ दीजिए क्योंकि किसी को दुख देना या कोई आपको बिना वजह दुख देता है तो यह गलत है। कई लोग, अपने मस्ती के लिए किसी का मज़ाक़ बनाते है तो सामने वाला इंसान उससे दुःखी होता है। इसलिए इस quotes मे लिखा गया है " यदि आप किसी को खुशी नहीं दे सकते तो आपको उसे दुःख देने का भी अधिकार नहीं है "  गौतम बुद्ध कहते है की हमें ऐसे शब्द बोलने चाहिए जो शांति लाये। हजार खोखले शब्द से बेहतर, वह एक शब्द है जो शांति लाये।  मित्रों कबीर दास जी ने भी कहा है कि " ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, औरोन को शीतल करे आपहूं शीतल होऐ " यानी कि हमे ऐसी बातें बोलनी चाहिए जिससे लोगों को शांति या खुशी महसूस हो एवं जिससे आप के भी मन को ठंडक पहुँचे और आपका मन भी शांत हो। जो आप दूसरे को दोगे एकदिन आपके पास वह लौटकर आएगा इसलिए सठीक कर्म करें।  आध्यात्मिक विचार - spiritual thoughts     चिंता दूर करे >पढ़े   . .  गौतम बुद्ध के विचार  कबीर के दोहे 

OVERCOME ANXIETY - चिंता दूर करे

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नमस्कार दोस्तों,  चिंता, ANXIETY, डिप्रेशन , घबराहट ये सारि चीज़े एक जैसे ही है।  इनको दूर करना एकदम सरल है। बस आप अपने जीवन शैली में इन चीज़ो को अपनाये १००% आपकी चिंता दूर हो जाएगी।  पहले चीज़ यदि आपको अपने सवस्थ को लेकर चिंता है, तो आप अपने सवास्थ के बारे में सोचना छोड़ दे। उसके बाद ये 6  उपाय करे :- १. कसरत ( EXERCISE  )  -   सुबह उठे, अपने पास के मैदान ( ग्राउंड ) में जाये। वहां RUNNING करे , कोई भी खेल खेले। जो मन में आये वह कसरत करे। इससे आपका शरीर और दिमाग दोनों मजबूत होगा।आपके शरीर में अच्छे हॉर्मोन रिलीज़ होंगे।    २. स्विमिंग ( तैरना ) -    यदि आपको तैरना आता है तो आप अपने घर के आस-पास स्विमिंग पूल या तालाब में जाकर कुछ समय तैरे। इससे आप अच्छा महसूस करेंगे। आपके सभी बॉडी मसल्स एक्टिव होंगे।      ३. ट्रेवल ( TRAVEL ) -    आप अपनी पसंदीदा जगह पर घूमने निकल जाये। नदी , पहाड़, वन, तीर्थ स्थल, मंदिर जो भी जगह आपको पसंद हो। इससे आप खुशी महसूस करेंगे और नए दृश्यों को देखकर आप सारे चिंताओं से मुक्त हो जायेंगे।      ४. पसंदीदा खाना -    घर पर खाली बैठे -बैठे बेकार के फालतू चीज़ो को सोचने से

THE INFULENCER - प्रभावित करने वाला

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आने वाला समय बहुतों के लिए थोड़ा मुश्किल होने वाला है।   Information और influence करने वाले बहुत अधिक मात्रा में बढ़ गए है। सोशल मीडिया पर हर जगह बहुत तरह के इन्फ्रोमेशन मौजूद है। अधिकतर लोग इनको बताने या लिखने वाला दावा करता है की वह सब सच है। अब कौनसा इन्फॉर्मेशन सही है और किससे प्रभावित होकर क्या करे ये सोचना है। अब जो अपने आप को नियंत्रित कर संयम रखकर एक तरह के आचरण व्यवहार रखकर जी रहा है , उसके लिए तो ज्यादा कुछ परेशानी नहीं है लेकिन जो information और influencer के आधार  पर प्रभावित होकर आचरण और व्यवहार कर रहा है उसके लिए परेशानी है। आप विज्ञापन में देखते है की यह प्रोडक्ट आपके लिए सही है और आप बिना डॉक्टर के सलाह के उसे लेते है तो उसका साइड इफ़ेक्ट भी हो सकता है। कोई प्रसिद्ध कलाकार आपको बताता है इसमें पैसा लगाए और आप जित सकते है तो उसमे हारने के चान्सेस कितना है, यह नहीं पता, फिर भी उसमे आप अपना सब धन लगा देते है। कुछ ऐसा दृश्य जो असल में हे ही नहीं, उसे सोशल मीडिया के क्रिएटरकहे जाने वाले उसका वर्णन करते है। आप में से कुछ लोग उसे सच मानकर शेयर भी कर देते है।    कुछ घटनाओं को र

हिन्दी सकरात्मक विचार 2024 के लिए - hindi sakratmak vichar

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नए वर्ष के लिए हिंदी सूविचार 2024 पूरे अच्छे से सोच विचार कर की गई तैयारी मे  जोखिम और डर नहीं होता है। संस्कार होना जरूरी इसलिए है क्योंकि यह कहीं न कहीं हमे गलत कर्मों से दूर रखता है।  आपके जीवन का सही निर्णय  आपसे बेहतर कोई नहीं ले सकता  कोशिश करे स्वयं निर्णय लेने का।  . . . . Hindi Thoughts for 2024 हिन्दी सकरात्मक विचार 2024 के लिए  नया साल नया विचार 

Kuch prashn - कुछ प्रश्न

 मित्रों आज कुछ नया करने का विचार आया मन मे तो सोचा आपसे कुछ प्रश्न करू? इससे आप लोगों के साथ थोड़ा बातचीत हो जाएगा। पहला प्रश्न : वायु से भी तेज कोन चलता है?   दूसरा : जन्म लेकर भी कोन नहीं हिलता डुलता है?  तीसरा : सबसे सुखी इंसान कोन हो सकता है? चतुर्थ : काजल से काला क्या है?  पांचवा : श्रेष्ठ धर्म क्या है?  उत्तर आपको पता है तो कमेन्ट कीजिएगा नहीं तो हम दो दिन बाद उत्तर देंगे। 

निस्वार्थ कर्म की कहानी - NISWARTH KARMA HINDI STORY

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निस्वार्थ कर्म एक समय की बात है। एक बार एक जंगल में एक साधु एक छोटी सी कुटिया में रहते थे। जहां पर एक नदी थी। वे दिनभर मंत्रों और भगवान के नाम का जाप करते और जंगल में मिलने वाले फल खाकर प्रसन्न रहते थे। उनकी कुटिया के पास ही बड़े-बड़े बांस के पौधे उग आए थे। संत बांस से टोकरी बनाना जानते थे। एक दिन उन्होंने मंत्र जाप करते-करते बांस से टोकरी बना दी। टोकरी बहुत ही सुंदर और मजबूत बनी थी। संत ने सोचा कि ये टोकरी मेरे लिए तो किसी काम की नहीं है। ये सोचकर उन्होंने टोकरी को नदी में बहा दिया। अब संत रोज एक टोकरी बनाते और नदी में बहा देते थे। इस काम में उन्हें आनंद आता था और समय भी कट जाता था। कुछ दिन तक तो ये क्रम चलता रहा। संत यह सोचकर ये काम कर रहे थे कि ये टोकरी किसी न किसी के काम आ जाएगी। लेकिन, एक दिन संत ने सोचा कि मैं ये काम कर रहा हूं, लेकिन इससे मुझे तो कोई लाभ नहीं हो रहा है। मुझे बिना वजह मेहनत नहीं करनी चाहिए। उन्होंने टोकरी बनाना बंद कर दिया। एक दिन वे नदी किनारे टहल रहे थे। कुछ दूर चलने के बाद उन्होंने देखा कि नदी किनारे एक बूढ़ी महिला बैठी है, जब वे उसके पास पहुंचे तो उन्हें मालू

धैर्य रखने के विचार patience quotes

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  संयम से किया हुआ कार्य की सफल होने की संभावना अधिक होती है

स्वयं लड़ना ही होगा

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स्वयं लड़ना ही होगा है स्वयं की कोई बाधा तो स्वयं लड़ना ही होगा राह दुर्गम हो भले ही राह पर चलना ही होगा रख के हिम्मत तू निकल चल ठोकरें खा, गिर, संभल, चल पीर होता है तो होय, हंसते मुस्काता चला चल अस्ताचल सूरज को आखिर ,फिर सुबह उगना ही होगा मन में उठते प्रश्न हैं तो ,उत्तरों की खोज कर तू सच भुवन में न मिलेगा, बन के गौतम वन विचर तू लोक में उपहास होगा, सिरफिरा भी कुछ कहेंगे राह के रोड़े भी तुमको 'पग को रोको' ही कहेंगे मानना ना हार ,काँटों से भी हो ज़्यादा प्रखर तुम बोध पाना है अगर तो ,बुद्ध तो बनना ही होगा सत्य है, संघर्ष ही तो उच्च आसन पर बिठाता है  स्वर्ण तपकर ताप में ही मोल अपना जान पाता है  नहीं आसान बिन तप ,साधना के जय कभी जय उसी की है स्वयं में जो स्वयं को जान पाता है  आँकना है खुद को तो, खुद को हमें पढ़ना ही होगा